सुकून

परमात्मा ने जब सृष्टी की रचना प्रारंभ की तो सबसे पहले उसने धरा बनाई और मुस्कुरा दिया
फिर आकाश बनाया और गौरवान्वित हो उठा
काव्य और प्रेम जैसे तत्वों को बनाकर वह खिलखिलाया
गृहस्थी बनाई तो उच्छ्वसित हुआ
संगीत का सृजन किया तो आल्हाद में भरकर स्वयं उसके सम्मुख नत-मस्तक हो गया
और फिर पर्वत, नदी, सागर, निर्झर, वन, मेघ, बरखा, पशु-पक्षी आदि बनाते-बनाते जब वह थक गया तो उसने सुकून के दो पल बनाए, उनको सहेजने के लिए माँ बनाई
फिर सुकून के खूबसूरत पल माँ के हवाले कर, माँ की गोद में सिर रख कर सो गया....
है ना!

2 comments:

स्वच्छ संदेश: हिन्दोस्तान की आवाज़ said...

ईश्वर ने माँ बनाई और उसका दर्जा सबसे ऊपर, पिता से भी ऊपर | माँ के पैरों में जन्नत बनाई | सिर्फ़ इंसानों में ही नहीं, संसार के हर जीव की की माँ में अपने बच्चे के लिए असीम ममता का का संचार भर दिया. भले ही जानवरों में अपने बच्चे के लिए थोड़े ही समय के लिए ही सही मगर ममता का संचार भरपूर किया | ज़रा सोचिये क्या आप किसी बछडे को उसकी माँ के सामने छू भर भी सकते है, नहीं ना | जैसे ही आप बछडे की तरफ़ जायेंगे, गाय आप पर हमला बोल देगी | यही है ईश्वर/अल्ल्लाह की कुदरत | Visit me at here.is/merikahania

Pinchu said...

ah kya sukun hai bhagwaan ka banaya hua. maza aagaya